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Friday, April 15, 2011

जो तुम आ जाते (महादेवी वर्मा)


जो तुम आ जाते एक बार.

कितनी करुणा कितने सन्देश
पथ में बिछ जाते बन पराग
गाता प्राणों का तार तार
अनुराग भरा उन्माद राग
आँसू लेते वे पथ पखार
जो तुम आ जाते एक बार ..

हँस उठते पल में आद्र नयन
 धुल जाता होठों से विषाद
छा जाता जीवन में बसंत
लुट जाता चिर संचित विराग
आँखें देतीं सर्वस्व वार
जो तुम आ जाते एक बार..