जो तुम आ जाते एक बार.
कितनी करुणा कितने सन्देश
पथ में बिछ जाते बन पराग
गाता प्राणों का तार तार
अनुराग भरा उन्माद राग
आँसू लेते वे पथ पखार
जो तुम आ जाते एक बार ..
हँस उठते पल में आद्र नयन
धुल जाता होठों से विषाद
छा जाता जीवन में बसंत
लुट जाता चिर संचित विराग
आँखें देतीं सर्वस्व वार
जो तुम आ जाते एक बार..
40 comments:
जो तुम आ जाते एक बार.
कितनी करुणा कितने सन्देश
पथ में बिछ जाते बन पराग
गाता प्राणों का तार तार
अनुराग भरा उन्माद राग
आँसू लेते वे पथ पखार
जो तुम आ जाते एक बार ..
मीनाक्षी जी बहुत सुंदर कविता बधाई और ढेरों शुभकामनाएं |
कितनी करुणा कितने सन्देश
पथ में बिछ जाते बन पराग
जो तुम आ जाते एक बार.
Thanks for sharing..
bahut khubsurat rachna
बहुत खूब रचना.
पढ़वाने के लिए शुक्रिया.
महादेवी जी को पडःावाने के लिये शुक्रिया। सुन्दर रचना।
महादेवी जी की रचना सीधे दिल को छूती हैं।
आपको एवं आपके परिवार को भगवान हनुमान जयंती की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।
अंत में :-
श्री राम जय राम जय राम
हारे राम हारे राम हारे राम
हनुमान जी की तरह जप्ते जाओ
अपनी सारी समस्या दूर करते जाओ
!! शुभ हनुमान जयंती !!
आप भी सादर आमंत्रित हैं,
भगवान हनुमान जयंती पर आपको हार्दिक शुभकामनाएँ
महादेवी जी सरल शब्दों में कितना कुछ कह देतीं हैं ...आभार !
आहा..क्या कोमल निवेदन और प्यारा रोष भरा मलाल छलक रहा है...
कुँवर जी,
ऐसी रचनाओं को पढने से मन शुद्ध हो जाता है। बहुत सुंदर
महादेवी जी की ये अमर रचना पढवाने के लिये आभार.
मीनाक्षी जी ,
आदरणीया महादेवी जी का सुन्दर प्रेमगीत प्रस्तुत करने का हार्दिक आभार ...
minakshi ji .......... mahadevi ji ko abhi padh hi rahi thi ki aapke blog par aane ka saubhagy mila .... abhi apne pathy pustak me mahadevi ji ki ye rachna ko padh rahi thi....aabhar ise fir se padhvane ke liye
महादेवी जी का इतना सुन्दर प्रेमगीत पढवाने का बहुत-बहुत आभार ...
मीनाक्षी जी,
महादेवी की यह रचना कई बार पढ़ी है ...
यूँ भी महादेवी मेरी पसंदीदा कवयित्री रही हैं
आज एक बार फिर पढ़कर पुराने दिनों की यादें ताजा हो गईं .....
आँखें देतीं सर्वस्व वार
जो तुम आ जाते एक बार..
bahut maarmik..
महादेवी जी की इतनी सुंदर रचना पढवाने का आभार ।
बड़ा प्यारा गीत पढवाया आपने ....आभार !
shandaaar!!
mahadevi varma jee ko share karne ke liye dhanayawd..
Is amar rachna ko padhvane ka aabhar.
............
तीन भूत और चार चुड़ैलें।!
14 सप्ताह का हो गया ब्लॉग समीक्षा कॉलम।
sunder rachna. aap prakriti premi hai, kavita ka bhav batata hai.
mere blog se--
vidhata ka sunder srizan hai,
prakriti.
prakriti kee uphar hai,
maa.
maa hee prakriti hai,
prakriti hee maa.
www.nature7speaks.blogspot.com
aap kee pratikriya mere blog ke s
sandarbh men ,prakriti jo hame her pal sikhati hai use hee aapne sunder tarike se banya kiya hai.
कितनी करुणा कितने सन्देश
पथ में बिछ जाते बन पराग
जो तुम आ जाते एक बार.
ऐसी पंक्तियाँ जो पाठक को अपनी और बरबस ही खींच ले जाएँ..... प्रस्तुति के लिए धन्यवाद
jo tum aa jate ek baar...............kya kahun....!!behat khubsurat....mahadevi jee ko share karne ke liye dhanywad...:)
हँस उठते पल में आद्र नयन
धुल जाता होठों से विषाद
great.......
दिग्गजा की रचना पढवाने के लिए आपका आभार !जो तुम आजाते एक बार ...
अच्छी रचना के लिए धन्यवाद...
avarnniya.....
सुरुचिपूर्ण चयन, सिलसिला बना रहे, शुभकामनाएं.
Achchha likhati hain aap
महादेवी जी की ये रचना पढवाने के लिये आभार.
महादेवी वर्मा जी की अनमोल रचना
पढवाने के लिए आभार स्वीकारें .
महादेवी की उत्तम कविता चयन कर पढवाई । धन्यवाद
chhotawriters.blogspot.com
आपका e - mail id नहीं मिला मुझे आपके प्रोफाइल पे.
आशीर्वाद लेने यहाँ तक आयी फिर.
आँखें देतीं सर्वस्व वार
जो तुम आ जाते एक बार..
tyaag ka utkrisht udaaharan....
गाता प्राणों का तार तार
अनुराग भरा उन्माद राग
आँसू लेते वे पथ पखार
जो तुम आ जाते एक बार ..
बहुत सुन्दर प्रस्तुति है,मीनाक्षी जी.
मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.
आपका हार्दिक स्वागत है.
महादेवी जी को पढना सदैव से सुखद लगता है. अच्छा लगा यहाँ पढना.
_______________
शब्द-शिखर / विश्व जनसंख्या दिवस : बेटियों की टूटती 'आस्था'
beautiful lines...my favourite..
Post a Comment