Friday, April 15, 2011

जो तुम आ जाते (महादेवी वर्मा)


जो तुम आ जाते एक बार.

कितनी करुणा कितने सन्देश
पथ में बिछ जाते बन पराग
गाता प्राणों का तार तार
अनुराग भरा उन्माद राग
आँसू लेते वे पथ पखार
जो तुम आ जाते एक बार ..

हँस उठते पल में आद्र नयन
 धुल जाता होठों से विषाद
छा जाता जीवन में बसंत
लुट जाता चिर संचित विराग
आँखें देतीं सर्वस्व वार
जो तुम आ जाते एक बार..

42 comments:

जयकृष्ण राय तुषार said...

जो तुम आ जाते एक बार.

कितनी करुणा कितने सन्देश
पथ में बिछ जाते बन पराग
गाता प्राणों का तार तार
अनुराग भरा उन्माद राग
आँसू लेते वे पथ पखार
जो तुम आ जाते एक बार ..
मीनाक्षी जी बहुत सुंदर कविता बधाई और ढेरों शुभकामनाएं |

Dinesh Rohilla said...

कितनी करुणा कितने सन्देश
पथ में बिछ जाते बन पराग
जो तुम आ जाते एक बार.
Thanks for sharing..

Minakshi Pant said...

bahut khubsurat rachna

विशाल said...

बहुत खूब रचना.
पढ़वाने के लिए शुक्रिया.

निर्मला कपिला said...

महादेवी जी को पडःावाने के लिये शुक्रिया। सुन्दर रचना।

वर्षा said...

महादेवी जी की रचना सीधे दिल को छूती हैं।

smshindi By Sonu said...

आपको एवं आपके परिवार को भगवान हनुमान जयंती की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।

अंत में :-

श्री राम जय राम जय राम

हारे राम हारे राम हारे राम

हनुमान जी की तरह जप्ते जाओ

अपनी सारी समस्या दूर करते जाओ

!! शुभ हनुमान जयंती !!

आप भी सादर आमंत्रित हैं,

भगवान हनुमान जयंती पर आपको हार्दिक शुभकामनाएँ

nivedita said...

महादेवी जी सरल शब्दों में कितना कुछ कह देतीं हैं ...आभार !

kunwarji's said...

आहा..क्या कोमल निवेदन और प्यारा रोष भरा मलाल छलक रहा है...



कुँवर जी,

mahendra srivastava said...

ऐसी रचनाओं को पढने से मन शुद्ध हो जाता है। बहुत सुंदर

वन्दना अवस्थी दुबे said...

महादेवी जी की ये अमर रचना पढवाने के लिये आभार.

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

मीनाक्षी जी ,

आदरणीया महादेवी जी का सुन्दर प्रेमगीत प्रस्तुत करने का हार्दिक आभार ...

रजनी मल्होत्रा नैय्यर said...

minakshi ji .......... mahadevi ji ko abhi padh hi rahi thi ki aapke blog par aane ka saubhagy mila .... abhi apne pathy pustak me mahadevi ji ki ye rachna ko padh rahi thi....aabhar ise fir se padhvane ke liye

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

महादेवी जी का इतना सुन्दर प्रेमगीत पढवाने का बहुत-बहुत आभार ...

हरकीरत ' हीर' said...

मीनाक्षी जी,
महादेवी की यह रचना कई बार पढ़ी है ...
यूँ भी महादेवी मेरी पसंदीदा कवयित्री रही हैं
आज एक बार फिर पढ़कर पुराने दिनों की यादें ताजा हो गईं .....

अमित श्रीवास्तव said...

आँखें देतीं सर्वस्व वार
जो तुम आ जाते एक बार..


bahut maarmik..

Mrs. Asha Joglekar said...

महादेवी जी की इतनी सुंदर रचना पढवाने का आभार ।

सतीश सक्सेना said...

बड़ा प्यारा गीत पढवाया आपने ....आभार !

Mukesh Kumar Sinha said...

shandaaar!!
mahadevi varma jee ko share karne ke liye dhanayawd..

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

Is amar rachna ko padhvane ka aabhar.

............
तीन भूत और चार चुड़ैलें।!
14 सप्ताह का हो गया ब्लॉग समीक्षा कॉलम।

neelam chand sankhla said...

sunder rachna. aap prakriti premi hai, kavita ka bhav batata hai.

mere blog se--
vidhata ka sunder srizan hai,
prakriti.
prakriti kee uphar hai,
maa.
maa hee prakriti hai,
prakriti hee maa.

www.nature7speaks.blogspot.com

neelam chand sankhla said...

aap kee pratikriya mere blog ke s
sandarbh men ,prakriti jo hame her pal sikhati hai use hee aapne sunder tarike se banya kiya hai.

singhSDM said...

कितनी करुणा कितने सन्देश
पथ में बिछ जाते बन पराग
जो तुम आ जाते एक बार.


ऐसी पंक्तियाँ जो पाठक को अपनी और बरबस ही खींच ले जाएँ..... प्रस्तुति के लिए धन्यवाद

Mukesh Kumar Sinha said...

jo tum aa jate ek baar...............kya kahun....!!behat khubsurat....mahadevi jee ko share karne ke liye dhanywad...:)

CS Devendra K Sharma "Man without Brain" said...

हँस उठते पल में आद्र नयन
धुल जाता होठों से विषाद

great.......

veerubhai said...

दिग्गजा की रचना पढवाने के लिए आपका आभार !जो तुम आजाते एक बार ...

Vivek Jain said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

वीना said...

अच्छी रचना के लिए धन्यवाद...

Sachin Malhotra said...

गाता प्राणों का तार तार
अनुराग भरा उन्माद राग
आँसू लेते वे पथ पखार
जो तुम आ जाते एक बार ..
बहुत ही बढ़िया!
मेरे ब्लॉग पर भी आपका स्वागत है : Blind Devotion

mridula pradhan said...

avarnniya.....

Rahul Singh said...

सुरुचिपूर्ण चयन, सिलसिला बना रहे, शुभकामनाएं.

वर्ज्य नारी स्वर said...

Achchha likhati hain aap

रचना दीक्षित said...

महादेवी जी की ये रचना पढवाने के लिये आभार.

daanish said...

महादेवी वर्मा जी की अनमोल रचना
पढवाने के लिए आभार स्वीकारें .

BrijmohanShrivastava said...

महादेवी की उत्तम कविता चयन कर पढवाई । धन्यवाद

dipak kumar said...
This comment has been removed by the author.
dipak kumar said...

chhotawriters.blogspot.com

बाबुषा said...

आपका e - mail id नहीं मिला मुझे आपके प्रोफाइल पे.
आशीर्वाद लेने यहाँ तक आयी फिर.

CS Devendra K Sharma "Man without Brain" said...

आँखें देतीं सर्वस्व वार
जो तुम आ जाते एक बार..
tyaag ka utkrisht udaaharan....

Rakesh Kumar said...

गाता प्राणों का तार तार
अनुराग भरा उन्माद राग
आँसू लेते वे पथ पखार
जो तुम आ जाते एक बार ..

बहुत सुन्दर प्रस्तुति है,मीनाक्षी जी.

मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.
आपका हार्दिक स्वागत है.

Akanksha~आकांक्षा said...

महादेवी जी को पढना सदैव से सुखद लगता है. अच्छा लगा यहाँ पढना.
_______________
शब्द-शिखर / विश्व जनसंख्या दिवस : बेटियों की टूटती 'आस्था'

neelima garg said...

beautiful lines...my favourite..